Wednesday, February 29, 2012

कुछ गिरहें (Some Knots)




कल गुलज़ार के नज्मों की ऐक किताब लिए बैठा था | पन्ने पलट ही रहा था की इस  Black and White नज़्म से मुलाक़ात हुई | मनो मेरी ही काहानी लिए कब से उन पन्नो में जा छुपा बैठा है | गुलज़ार की नज्में बहुत रंगबिरंगी होती हैं, पर इसमें मुझे ऐक सुना सा चेहरा नज़र आया | दुनिया से लड़ते लड़ते छिल गया था, थक गया था | 

कितनी गिरहें खोली हैं मैंने... कितनी गिरहें बाकी हैं...
पाँव में पायल, बाहों में कंगन
गले में हँसली, कमरबंद, छल्ले और बिछुए
नाक, कान छिदवाए गए
और ज़ेवर-ज़ेवर कहते-कहते
रीत रिवाजों की रस्सियों से में जकड़ी गई
उफ़! कितनी तरह मैं पकड़ी गई
अब छिलने लगे हैं हाथ पाँव
और कितनी खराशें उभरी हैं
कितनी गिरहें खोली हैं मैंने... कितनी गिरहें बाकी हैं... 

कितनी सच बात कही है गुलज़ार ने! 

खुली हुई है कुछ गिरहें मेरी भी
टूटे हुए हैं धागे कई
ज़ेवर बिखरे पड़े हैं मेज़ पर
और ऐक दिल रखा हुआ है  उस पुरानी सी अलमारी में...

Tuesday, January 31, 2012

Mutilated and Scattered





तोड़ आया था मैं कल
कुछ ख्वाब
और उनके साथ कुछ सपने

जला दिए थे मैं कल
कुछ ख़त
और उनके साथ वह लम्हे

फाड़ दीं थी मैंने कल
वह तस्वीर
और उसके साथ जुड़े वह पल

कुचल आया था मैं कल
ऐक दिल
और उसके लाखों अरमां

काट आया था मैं कल
ऐक रिश्ता
और उसकी नसें

जलाई दीं मैंने कल
वह लाशें

बिखरा कर आ रहा हूँ
उसके अवशेष

अख़बार में पढ़ लेना कल
मेरे मौत का चर्चा |

Mutilated and Scattered. 
Some Dreams. Some Letters. Some Photographs. A Heart. A Relationship.
I had cremated a cadaver yesterday.  
Do read it tomorrow. The story of my Death.