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Tuesday, June 24, 2014

एक Cutting सपना



प्यास लगी थी 
तो खुली आखों से कुछ सपने देखने चला गया 
रोज़ ही की तरह पृथ्वी की ऒर 

भैया, एक गिलास सुलेमानी देना 
क्या? नहीं है?
चलो, फिर एक खाली गिलास ही दे दो 

और जा बैठा इन चमचमाती केतलियों के नीचे 
केत्लियान, जिनमे से सपने बह रहे थे 

भैया, एक cutting सपना दे दो 
कई रातों से सोया नहीं हूँ  

Sunday, July 31, 2011

खौफ़ की वह रात



डर से चुप थीं सडकें
चुप थे लोग और खामोश थीं आखें
आवाजें सुनाई दे रही थी तो बस television से
Breaking news जो मिल गया था उन्हें
आवाजें सुनाई दे रही थी तोह बस बादलों की
कड़कराहट से लोगों में जिंदा रहने का एहेसास जगाना
कड़कराहट से उन लोगों को जगाना
जो सो रहे थे या मुर्दा लाशों को देख रहे थे

बरसात की ही शाम थी वो
आसमान ने सूरज को परदे में धक् लिया था कहीं
खून बरस रहा था आसमां से
और ज़मीन आग के गोले उढ़ेल रही थी

धरती नम हो गयी थी उस शाम खून से
और लाशें ऐसी बिखरी पड़ी हों जैसी की कीचड

सो नहीं पाया था उस रात कोई
चाँद भी उस रात बादलों के पीछे खामोश खड़ा सब देख रहा था
खामोश थी आखें और चुप थे लोग
डर से सडकें भी चुप थी सारी

भीगा था मैं भी उस बरसात में
खेलीं थी मुझ पर भी वह बूँदें

कहो  तो, कभी लहू को पानी में समाते हुए देखा है तुमने?

That night, blood had dissolved in the rain
That night, the streets were silent with fear
Silent were the people and mum were the eyes

That night, it had rained blood
And the earth had been breathing flames

Where were you that night when the blood mixed with the water?