Saturday, March 31, 2012

जलते हुए ख्याल (Burning thoughts)




आग सुलग रही है हर तरफ
देहक रहा है ये शहर
और लू चल रही है साँसों से 

चट्टान जल रहे है आज
मोम जैसे पिघल रहे हैं मकान
और जलती चिताओं की लाइन लगी है राशन की दूकान पर

अखब़ार जल रहा है
चिट्टी जल रही है 
कलम की स्याही सुख कर जवाला बन गयी है

रगों में लहू नहीं, लावा बह रही है
दिमाग पिघल कर नाक कान से बह रहा है
आखों से आंसू नहीं, गरम भाप निकल रही है
और ज़बान शोले उगल रहे हैं



अब कुछ जले हुए ख्याल सेष बाकी है,
और ख्वाब जल कर राख़ से बिखरे हैं मेज़ पर मेरे

बस ये ऐक दिल है, जो देहक नहीं, धड़क रहा है
अब के सावन इसे भी ना सुलगा दे 

There is fire every where. The entire city is burning. There are burning cadavers walking on the streets.
Blood is flowing like magma. Molten Brains are flowing through the crevices. Tears are evaporating and mouths have become flame throwers. 
Now some burnt thoughts remain...and the ashes of my dreams lay scattered on the floor.
Just this Heart. Its still beating. 
Hope the rains don't ignite it too.

2 comments:

  1. Simply superb………..marvelous….
    hyderabadonnet.com

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  2. Marvelous…..
    chennaiflowerplaza.com

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