Saturday, June 30, 2012

मैं उडूँगा




जला दो 
जला दो आज मुझे 
मैं उडूँगा

काट दो
काट दो पंख मेरे आज 
मैं उडूँगा

क़ैद कर लो 
क़ैद कर लो आज पिंजरे में तुम 
मैं उडूँगा 

बारिश के बूंदों के साथ भर जाते हैं घाव मेरे
और बह जाता है दर्द पानी के साथ
सपने देखने लगता हूँ मैं इस सांवले आसमां की
और उमड़ आते हैं अरमान कई, इन पागल लहरों की तरह

आखों के wiper शुरू हो जाते हैं चलना 
और दिखने लग जाता है कल, जो अब तक धुंधला सा था
पैर, जो मैले हो गए थे रोज़ के कुँत्लों से
धुल जातें हैं इस बहाव में

रोक ना सकोगे तुम मुझे
बाँध लो बेड़ियों में अपनी चाहे
काम ना आएँगी तुम्हारी झूठी खुशियाँ
कि मैंने आसमां छु लिया है आज
कि मैंने खून चख़ लिया है आज

ए बादल, आज जम के बरस 
ना रोक खुद को किसी आपे में तू 
कि मैं उडूँगा


7 comments:

  1. Beautiful.. Loved it.. :)

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